Monday, February 2, 2009

ये तो अंधेर है

इन दिनों पूरे देश में आगामी लोकसभा चुनाओ की तय्यारिया जोरो से चल रही है तो भला अपना उत्तराखंड भी कहा पीछे रहने वाला है। यहाँ भी चुनाव की दस्तक सुनाई देने लगी है। एक ओर जहा चुनाव आयोग,शासन- प्रशासन के साथ मिलकर मतदाता सूचि को अन्तिम रूप देने और चुनाव सम्बन्धी अन्य तय्यारियो में लगा हुआ है वही राजनीतिक दल भी अपने-अपने गोटे फिट करने में जुट गए है। बसपा के बाद अब भाजपा ने भी पांचो लोकसभा लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए है, इधर केन्द्र में सत्ता की कमान संभाल रही कांग्रेस फिलहाल प्रत्याशी घोषित नही कर पाई है। खैर जिस दिलचस्प बात का जिक्र में यहाँ करने जा रहा हूँ उसका ताल्लुक कांग्रेस से है भी नही लेकिन भी यह सत्ता और व्यवस्था का सवाल तो है ही, दोस्तों गौर फरमाए अगर आपको याद होगा तो पिछले हफ्ते तक बीजेपी की ओर से टिहरी सीट का टिकेट एक बार फिर राजघराने के ही किसी चिराग को ही दिए जाने की बात हो रही थी, हालाँकि पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने इस सीट से राजघराने पर ही दाव लगाया था लेकिन कांग्रेस के विजय बहुगुणा के आगे राज परिवार की चली और राजा मनुजेन्द्र शाह को हार का मुँह देखना पढ़ा। इस बार भाजपा ने इस सीट पर निशाने बाज जसपाल राणा को अपना उम्मीदवार बनाया है, वैसे जसपाल भाजपा के खेवनहार राजनाथ सिंह के रिश्तेदार भी है वरना ये तो सब जानते है कि खेलो और फिल्मो के सितारे राजनीति की बारीकिया कम ही समझ पाते है हां चुनाव जीतने कि गारंटी दी जा सकती है, लेकिन इससे जनता का जो नुक्सान होगा उसकी चिंता किसे है। फिर वापस चलते है राजघराने कि ओर इस बार बीजेपी टिहरी सीट से पूर्व महारानी टीका रानी लक्ष्मी शाह को अपना उम्मीदवार बनाना चाहती थी, इसके पीछे रानी की कोई प्रतिबद्धता या राजनीतिक अनुभव नही था बल्कि बीजेपी कि नजर रानी के बहाने उन हजारो नेपाली मूल के वोटरों पर थी जो कभी नेपाल कि राजकुमारी रही टिका रानी को अपना समर्थन दे सकते थे, लेकिन एन वक्त पर बीजेपी को अपने कदम वापस लेने पड़े असल में हुआ यह कि जिस रानी के पीछे पूरी बीजेपी लट्टू हो रही थी वह तो अब तक भारत कि नागरिक तक नही है, रानी ने विवाह के
दशको बाद तक भारत की नागरिकता नही ली है, और अब राजपरिवार का कहना है कि रानी की नागरिकता की प्रक्रिया चल रही है, एक ओर तो रानी देश की नागरिक तक नही है ओर दूसरी ओर टिहरी जिला प्रशासन की मेहरबानी तो देखो यहाँ रानी का नाम पिछले कई साल से वोटर लिस्ट मई दर्ज है, अब इस मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन की आफत आ गई है, टिहरी की डीएम सौजन्या का कहना है की बिना नागरिकता के ही मतदाता सूची शामिल करना ग़लत है, इस तरह से देखा जाय तो यह मामला दोहरी नागरिकता का भी है,देश का संभिधान किसी को भी दोहरी नागरिकता की इजाजत नही देता लेकिन नेपाल की नागरिकता ओर भरत में मतदाता क्या यह मामला इस दायरे से बाहर का है, लेकिन राजघरानों पर तो इस देश के कानून लागू ही नही होते, अब सवाल यह है जब रानी इस देश की नागरिक ही नही थी तो फिर उसे मतदाता कैसे बनाया गया, साथ ही यह भी कीकिन के सहयोग से यह संभव हुआ। टिहरी जिला प्रशासन जो इस मामले में चूक कबूल चुका है,क्या राजपरिवार या अन्य लोगो के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही कर पायेगा, नही तो उस कार्यवाही का क्या मतलव जो बंग्लादेसियो ओर नेपालियों के ख़िलाफ़ की जाती है.

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